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शिक्षण प्रभाविक तत्व :
> शिक्षण तथ्यात्मक, सूचनात्मक एवं अवधारणात्मक ज्ञान प्राप्त करने की क्रमिक प्रक्रिया है जिसमें एक शिक्षक, विद्यार्थियों को ज्ञान एवं अन्य प्रकार की सूचनाएं प्रदान करता है।
> लेकिन यहाँ यह भी जानना आवश्यक है कि वे कौन-से कारक हैं, जो शिक्षण की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।
>> यहाँ शिक्षण को प्रभावित करने वाले कुछ ऐसे ही कारकों का वर्णन किया जा रहा है:
शिक्षक की शेक्षणिक पृस्ठभूमि :
> प्रभावी शिक्षण कार्य के लिए शिक्षक का उच्च शिक्षित होना आवश्यक है।
> उच्च रूप से शिक्षित एक शिक्षक, विद्यार्थियों को प्रभावी निर्देश दे सकता है तथा शिक्षा के निर्धारित एवं वांछित लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है।
> यदि एक सामान्य स्नातक शिक्षक की तुलना में एक बी.एड., डी.एड., परास्नातक या पी.एच.डी. डिग्रीधारक शिक्षक की तुलना की जाए तो हम पाते हैं कि उच्च शिक्षा प्राप्त शिक्षक, शिक्षण कार्य ज्यादा अच्छे से करता है
शिक्षक का अनुभव :
> शिक्षक का अनुभव भी शिक्षण कार्य को प्रभावित करता है।
> हम देखते हैं कि जैसे-जैसे शिक्षक का अनुभव बढ़ता जाता है, उसका शिक्षण कौशल और अच्छा होता जाता है।
> यह देखा गया है कि जो शिक्षक अनुभवहीन होते हैं, वे न तो अच्छी तरह से शिक्षण कर पाते हैं और न ही विद्यार्थियों की शिक्षण आवश्यकताओं को पूरा कर पाते हैं।
शिक्षक का कौशल :
> कौशल किसी भी कार्य को बेहतर तरीके से करने की विधि है।
> यदि शिक्षक का शिक्षण कौशल अच्छा है तो वह शिक्षण कार्य को अच्छे से संपन्न करता है।
> शिक्षक के शिक्षण कौशल को बेहतर बनाने के लिए उन्हें प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिससे कि वे बेहतर परिणाम दे सकें।
शिक्षक, सहायक सामग्री :
> शिक्षक द्वारा शिक्षण युक्तियों का उपयोग
> शिक्षक द्वारा शिक्षण विधियों का उपयोग
> शिक्षक की संवाद करने की क्षमता
> शिक्षक की अन्य लोगों से संबंध स्थापित
> करने की क्षमता, एवं
> शिक्षण की कार्य के प्रति गंभीरता।
| प्रिन्ट सामग्री | पाठ्यपुस्तकें, पम्पलेट, हैंडा-आउट, अध्ययन-मार्गदर्शिकाएँ, मैनुअल |
|---|---|
| श्रव्य सामग्री | यूएसबी ड्राइव, कैसेट, माइक्रोफोन, |
| दृश्य सामग्र | चार्ट, वास्तविक वस्तुएँ, फोटोग्राफ, ट्रान्सपैरेन्सी |
| श्रव्य-दृष्य सामग्री | स्लाइड, टेप, फिल्में, टेलीविजन, मल्टिमिडिया, यू-ट्यूब |
| इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ | संगणक, ग्राफ दर्शाने वाले कैलकुलेटर, टैबलेट, स्मार्ट फोन |
परिभाषा :
सहायक सामग्री वह सामग्री है जो कक्षा में या अन्य शिक्षण परिस्थितियों में लिखित या बोली गई पाठ्यसामग्री को समझने में सहायक होती है।
कोई भी ऐसी सामग्री जिसके माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को उद्दीप्त किया जा सके, अथवा श्रवणेन्द्रिय संवेदनाओं के द्वारा आगे बढ़ाया जा सके, वह सहायक सामग्री कहलाती है।
आर्थिक एवं सामाजिक कारक :
> शिक्षक एवं विद्यार्थियों की आर्थिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमि भी शिक्षण की प्रक्रिया को प्रभावित करती है।
> शिक्षक की आर्थिक पृष्ठभूमि में मुख्यतया उसका वेतन होता है।
> जब एक शिक्षक को उचित और पर्याप्त वेतन मिलता है तो वह चिंतामुक्त होकर शिक्षण का कार्य करता है।
> इसी प्रकार, विद्यार्थियों को भी निर्धन एवं संपन्न आर्थिक पृष्ठभूमि वाले छात्रों में बांटा जा सकता है।
> शिक्षक की सामाजिक पृष्ठभूमि में मुख्य रूप से उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि आती है।
> यदि कोई बालक शिक्षक परिवार से संबंधित है, जिसमें उसके माता- पिता और अन्य लोग भी शिक्षण का कार्य करते हैं तो उसे अच्छे शिक्षण में संबंधित कई बातों की जानकारी पहले से ही होती है।
> छात्रों की सामाजिक पृष्ठभूमि में शिक्षित एवं अशिक्षित पारिवारिक पृष्ठभूमि के छात्र आते हैं।
> यह देखा गया है शिक्षित पारिवारिक पृष्ठभूमि के छात्र पढ़ने में थोड़ा अच्छे होते हैं, जबकि अशिक्षित पारिवारिक पृष्ठभूमि के छात्र पढ़ने में थोड़ा कमजोर होते हैं।
> वैसे यह कोई ठोस नियम भी नहीं है कि ऐसा। होता ही है।
कक्षा का माहौल :
> कक्षा का माहौल भी शिक्षण के कार्य पर प्रभाव डालता है।
> एक कक्षा में अच्छा माहौल बनाने में शिक्षक एवं छात्र, दोनों का सहयोग आवश्यक होता है।
> अच्छे वातावरण वाली कक्षा में शिक्षक भी शिक्षण का कार्य अच्छे से करता है तथा छात्र भी सीखने का कार्य अच्छे से करते हैं।
> ऐसा होने से शिक्षक को पढ़ाने एवं छात्रों को शिक्षक की बातों को सुनने में आसानी रहती है।
विषय-वस्तु :
> कक्षा में किसी विषय के प्रभावी शिक्षण के लिये यह आवश्यक शिक्षक को उस विषय की पूरी जानकारी हो।
> जब कोई शिक्षक ऐसे विषय को पढ़ाता है, जिसमें उसने विशेषज्ञता प्राप्त नहीं की है, तो वह अपने शिक्षण से छात्रों को उतना प्रभावित नहीं कर सकता।
> लेकिन वही शिक्षक यदि अपने विशेषज्ञता प्राप्त विषय को पढ़ाता है, तो वह उसे विद्यार्थियों को और अच्छे ढंग से समझ सकता है।
> ऐसा भी हो सकता है कि वह छात्रों को कुछ गलत जानकारी प्रदान कर दे।
शिक्षण संस्थानों की प्रशासनिक निति :
> शिक्षण संस्थानों की प्रशासनिक नीति भी शिक्षण की क्रिया पर प्रभाव डालती है।
> यदि कोई शिक्षक किसी कार्य को करना चाहता है या छात्रों की भलाई के लिये उन्हें किसी अलग तरीके से पढ़ाना चाहता है उसे उसकी छूट होनी चाहिए।
संस्थागत सुविधाएँ :
किसी शिक्षण संस्था द्वारा छात्र को दी जाने वाली वे सभी सुविधाएं जो सीधे तौर पर शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावित करती है, संस्थागत सुविधाएं कहलाती है। संस्थागत सुविधाओं में निम्नलिखित बातों को शामिल किया जाता हैं-
- रुचिकर पाठ्यक्रम
- शिक्षण प्रबन्ध
- योग्य अध्यापक
- प्रौद्योगिकी का प्रयोग
- दूरस्थ शिक्षा प्रग्रामों का संचालन
- ऑनलाइन शिक्षण प्रक्रिया को सुलभ बनाना
- अनुकूल शिक्षण वातावरण तैयार करना
- शिक्षण सहायक साधनों की सुलभता
- स्वच्छ हवा व स्वच्छ पेय जल
- स्वच्छ शौचालय
- बिजली व इन्टरनेट सुविधा
> किसी भी शैक्षिक संस्थान की गुणात्मक और सकारात्मक प्रगति, उस संस्थान में दी जाने वाली सुविधाओं पर निर्भर करती है।
> सुविधाएं आवश्यकतानुरूप होनी चाहिए और इनमें भी क्रमिक विकास के अनुसार हों, तो सम्पूर्ण शैक्षिक संस्थान में कार्यरत शिक्षक, विद्यार्थी, शोधार्थी, अभिभावक, संरक्षक इन सुविधाओं के द्वारा मिलने वाले अप्रत्यक्ष लाभ से जुड़ाव महसूस करते हैं।
> यह जुडाव इन सभी शैक्षिक संस्थान में कार्यरत शैक्षिक समूह को आगे चल कर प्रत्यक्ष रूप से जोड़ता है और इस प्रत्यक्ष जुड़ाव द्वारा भावनात्मक लगाव बढ़ता है, जिससे कर्त्तव्य की भावना जन्म लेती है।
> किसी भी शैक्षिक संस्थान में सामूहिक उत्तरदायित्व का विकास होता है, जिसके द्वारा ही कोई शैक्षिक संस्थान उन्नति कर सकता है।
> प्रायः बातचीत में लोग एक-दूसरे से कहते हैं कि वे अमुख संस्थान के पूर्व छात्र, पूर्व शोधार्थी, पूर्व शिक्षक रह चुके हैं।
> पूर्व विद्यार्थियों को जोड़ने से उस शैक्षिक संस्थान की विचारधारा और सोच का विकास होता है।
शैक्षिक वातावरण :
> यह जुडाव इन सभी शैक्षिक संस्थान में कार्यरत शैक्षिक समूह को आगे चल कर प्रत्यक्ष रूप से जोड़ता है और इस प्रत्यक्ष जुड़ाव द्वारा भावनात्मक लगाव बढ़ता है, जिससे कर्त्तव्य की भावना जन्म लेती है।
> किसी भी शैक्षिक संस्थान में सामूहिक उत्तरदायित्व का विकास होता है, जिसके द्वारा ही कोई शैक्षिक संस्थान उन्नति कर सकता है।
> प्रायः बातचीत में लोग एक-दूसरे से कहते हैं कि वे अमुख संस्थान के पूर्व छात्र, पूर्व शोधार्थी, पूर्व शिक्षक रह चुके हैं।
> पूर्व विद्यार्थियों को जोड़ने से उस शैक्षिक संस्थान की विचारधारा और सोच का विकास होता है।
> लेकिन हाल के वर्षों में सूचना संचार आधारित विभिन्न प्रकार की सीमाएं जैसे-वाई-फाई इत्यादि के माध्यम से इंटरनेट आधारित विभिन्न प्रकार की सेवाओं के द्वारा इसके शैक्षिक वातावरण में नवीन बदलाव आये हैं।





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