
शिक्षण अभिक्षमता | ( Teaching Aptitude )
→ शिक्षण ( Teaching )अंग्रेजी के टीचिंग शब्द का हिंदी रूपांतरण है , शिक्षण से अभिप्रय "सीखना" है |
→ अभिक्षमता ( Aptiude ) से असय किसी विशेष कार्य को करने की क्षमता से है | इसे 'योगिता' भी कहा जाता है | अभिक्षमता शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की हो सकती है | अभिक्षमता जन्मजात होती है | यह प्राप्त या सीखी नहीं जा सकती |
∎ अधिक ज्ञानी जब एक कम ज्ञानी व्यक्ति के ज्ञान में वृद्धि कर देता है तो उसे शिक्षण कहते है
शिक्षण का संकुचित अर्थ |
→ शिक्षण के संकुचित अर्थ का सम्बन्ध स्कूली शिक्षा से है | जिसमे अध्यापक द्वारा एक बालक को निश्चित स्थान एक विशिस्ट वातावरण में निश्चित अध्यापको द्वारा उसके व्यव्हार में पाठ्यक्रम के अनुसार परिवर्तन किया जाता है |
शिक्षण का व्यापक अर्थ |
→ शिक्षण के व्यापक अर्थ में वह सब शामिल कर लिया जाता है | जो व्यक्ति अपने पुरे जीवन में सीखता है | यथार्थ शिक्षण का व्यापक अर्थ वह हे जिसमे व्यक्ति औपचारिक, अनौपचारिक साधनो के द्वारा सीखता है
उदाहरण : जब एक व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण घटको से जैसे : पड़ोसी, मित्र, परिवार, शिक्षक आदि से जन्म से मृत्यु तक कुछ ना कुछ सीखता रहता है जिसे हम शिक्षण कहते है |
शिक्षण की परिभाषा : "वर्ल्ड बुकऑफ़ इनसाइक्लोपीडिया" के अनुसार : शिक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को ज्ञान कौसल रूचि को सिखने या प्राप्त करने में सहायता करता है |
→ "गेज" के अनुसार : शिक्षण से तात्पर्य उस व्यक्तिगत पारस्परिक प्रभाव से है जिसे किसी व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के व्यव्हार क्षमता में परिवर्तन लाने हेतु डाला जाता है|
∎ शिक्षण बालक के व्यव्हार में परिवर्तन करने की प्रकिरिया है|
∎ शिक्षण एक उद्देश्पूर्ण प्रक्रिया है|
∎ शिक्षण सामाजिक एवं सामाजिक प्रक्रिया है|
∎शिक्षण विकासात्मक प्रक्रिया है|
→ "बी.ओ स्मिथ" के अनुसार : शिक्षण सिखने हेतु संपन्न किये जाने वाली क्रियाओ की एक प्रणाली है |
→ "थॉमस फ ग्रीन" के अनुसार : "शिक्षण" शिक्षक का वह कार्य है जिसे बालक के विकास के लिए किया जाता है |
शिक्षण के उद्देश :
1. जीवकोपार्जन
2. बौद्धिक विकास
3. शारीरिक विकास
4. चरित्र निर्माण
5. सामाजिकता
6. परिस्थिति से अनुकूलन
शिक्षण स्तर :
1. स्मृति स्तर : स्मृति स्तर शिक्षण का सबसे विचारहीन स्तर है; यह केवल स्मृति को तेज करने या जानकारी को समझने की मानसिक क्षमता से संबंधित है। यहाँ, शिक्षक शिक्षार्थी को जानकारी प्रस्तुत करता है, और वे तथ्यों को याद करने का प्रयास करते हैं।
शिक्षण के स्मृति स्तर में सबसे कम भागीदारी की आवश्यकता होती है क्योंकि इसमें केवल जानकारी को ग्रहण करने की आवश्यकता होती है, न कि उसके अर्थ और अनुप्रयोग को समझने की|
शिक्षण के स्मृति स्तर की विशेषताएं:
- ∎ स्मृति स्तर का शिक्षण निम्न कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है, क्योंकि इस समय उनकी बुद्धि का विकास हो रहा होता है।
- ∎ यह आमतौर पर तथ्यात्मक जानकारी सीखने का पहला स्तर होता है।
- ∎ स्मृति सीखना स्मृति को अधिकतम जानकारी को बनाए रखने और आवश्यकता पड़ने पर शीघ्रता से याद करने के लिए प्रशिक्षित करता है।
- ∎ शिक्षण के बोध स्तर के लिए स्मृति अधिगम एक पूर्वापेक्षा है।
शिक्षण के स्मृति स्तर के गुण :
- ∎ केवल निम्न स्तर के बच्चों के लिए उपयोगी है, क्योंकि उनकी बुद्धि का विकास हो रहा है
- ∎ यहां शिक्षक की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है; वे छात्रों के लिए सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाते हैं।
- ∎ यहां अर्जित ज्ञान भविष्य में आवश्यक बौद्धिक शिक्षा का आधार बनेगा।
शिक्षण के स्मृति स्तर के दोष :
- ∎ उच्च कक्षा के छात्रों के लिए उपयुक्त नहीं
- ∎ शिक्षण के स्मृति स्तर में छात्रों और शिक्षकों के बीच बातचीत काफी कम है।
- ∎ सीखने वाले के पास उत्तरों को रटने के अलावा कोई भूमिका नहीं होती। वे जो पूछा जाता है उसे याद करने की इच्छा रखते हैं।
2. बोध स्तर :शिक्षण के समझ स्तर में, छात्रों को अवधारणाओं के निहितार्थ को स्वीकार करना चाहिए, तत्वों के बीच संबंधों की व्याख्या करनी चाहिए, और अवधारणाओं, तथ्यों और सिद्धांतों को लागू करना चाहिए। इसे हर्बर्टियन थ्योरी ऑफ एपर्सेप्शन से लिया गया है, जहाँ शिक्षार्थी तथ्यों के बीच संबंध ढूँढना शुरू करता है न कि केवल उत्तरों को रटना।
मॉरिस एल. बिगे ने अपनी पुस्तक " छात्रों के सीखने के सिद्धांत" में शिक्षण की समझ को इस प्रकार परिभाषित किया है, "छात्रों को सामान्यीकरण और विवरणों के बीच, सिद्धांतों और एकल तथ्यों के बीच संबंधों से परिचित कराना, और यह दिखाना कि सिद्धांतों को किस उपयोग के लिए लागू किया जा सकता है।"
शिक्षण के समझ के स्तर में, एक शिक्षक को एक वास्तुकार माना जाता है जो सीखने के मज़ेदार और समझने योग्य तरीके से अवधारणाओं को बुनने के लिए बौद्धिक सीखने का उपयोग करता है। सीखने के इस स्तर को पढ़ाने के छह तरीके हैं:
- → तैयारी
- → प्रस्तुति
- → तुलना
- → सामान्यकरण
- → आवेदन
- → मूल्यांकन
शिक्षण के समझ स्तर की विशेषताएं :
- ∎ यह उच्च संज्ञानात्मक क्षमता और स्मृति स्तर वाले छात्रों के लिए सर्वोत्तम है।
- ∎ तथ्यों को आत्मसात करने में विद्यार्थी और शिक्षक दोनों की सक्रिय भूमिका होती है।
- ∎ शिक्षक विद्यार्थियों को अवधारणाओं को समझने में मदद करने के लिए व्याख्यान, चर्चा और उदाहरण जैसी विभिन्न शिक्षण विधियों का उपयोग करते हैं।
- ∎ शिक्षण के स्तर को समझना विद्यार्थियों के लिए शिक्षण के चिंतनशील स्तर में प्रवेश करने का आधार तैयार करता है।
शिक्षण के समझ स्तर के लाभ :
- ∎ छात्रों में उन्नत संज्ञानात्मक कौशल का विकास
- ∎ अध्यापक विद्यार्थियों को अवधारणाओं को समझने में मदद करने के लिए फ्लैशकार्ड, चार्ट, टीवी चार्ट और मॉडल का उपयोग कर सकते हैं।
- ∎ शिक्षण के इस स्तर में, शिक्षक कक्षा को रोचक और विद्यार्थियों के लिए निरंतर सीखने हेतु आकर्षक बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- ∎ इस स्तर पर अर्जित ज्ञान विद्यार्थियों के पास बहुत लम्बे समय तक रहता है।
शिक्षण के समझ स्तर के नुकसान
- ∎ आंतरिक प्रेरणा पर कम ध्यान दिया जाता है।
- ∎ कोई व्यक्तिगत शिक्षा नहीं
- ∎ धीमी गति से सीखने वालों को अवधारणाओं को समझने में कठिनाई हो सकती है।
3. चिंतन स्तर : चिंतनशील शिक्षण शिक्षण का सर्वोच्च स्तर है। छात्र केवल उत्तर याद नहीं करते, न ही वे केवल अवधारणाओं को समझते या व्याख्या करते हैं, बल्कि वे अवधारणाओं और सिद्धांतों पर गंभीरता से विचार करते हैं और उन पर विचार भी करते हैं।
मॉरिस एल. बेग ने "शिक्षण का चिंतनशील तरीका" को परीक्षण साक्ष्य के प्रकाश में किसी विचार या ज्ञान के कथित लेख की सावधानीपूर्वक, आलोचनात्मक जांच के रूप में परिभाषित किया है जो इसका समर्थन करता है और आगे के निष्कर्षों की ओर इशारा करता है।
चिंतनशील शिक्षण स्तर की विशेषताएं :
- ∎यह सीखने का उच्चतम स्तर है जिसमें एमएलटी और यूएलटी दोनों शामिल हैं।
- ∎छात्र अवधारणा की सामान्य समझ से आगे बढ़कर उचित शोध करने और सीखने के लिए समस्या-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के इच्छुक हैं।
- ∎शिक्षण का चिंतनशील स्तर छात्रों को तर्क, विवेक और कल्पना द्वारा अपनी समस्याओं को हल करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
- ∎विद्यार्थी प्राथमिक स्थान पर हैं और शिक्षक गौण।
- ∎कक्षा का वातावरण 'खुला और स्वतंत्र' है, और छात्र सीखने के इस नए स्तर को अपनाने के लिए स्वयं प्रेरित हैं।
चिंतनशील शिक्षण स्तर के लाभ :
∎शिक्षण का चिंतनशील स्तर विषय-केन्द्रित या शिक्षक-केन्द्रित नहीं है; यह शिक्षार्थी-आधारित है।
- ∎इस स्तर पर, छात्रों की आलोचनात्मक क्षमताओं का उपयोग करके समस्या की पहचान करने और समाधान निर्धारित करने पर मुख्य जोर दिया जाता है।
- ∎शिक्षण के चिंतनशील स्तर में शिक्षकों की भूमिका काफी लोकतांत्रिक है; यह छात्रों पर ज्ञान थोपता नहीं है।
- ∎यह शिक्षण विधियों के अन्य स्तरों की तुलना में अधिकतम लचीलापन प्रदान करता है।
चिंतनशील स्तर के शिक्षण के नुकसान :
- ∎यह उन छोटे विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त नहीं है जो बौद्धिक रूप से विकसित नहीं हैं।
- ∎इस स्तर पर छात्रों को अपनी पढ़ाई का जिम्मा स्वयं उठाना पड़ता है, जो हर किसी के लिए एक समान समाधान नहीं है।
- ∎यह एक समय लेने वाली प्रक्रिया है और इसमें निपुणता प्राप्त करने में कई दिन और वर्ष लग जाते हैं।
- ∎धीमी गति से सीखने वालों को अवधारणाओं को समझने में कठिनाई हो सकती है।
शिक्षण के प्रकार :
[ लोकतंत्रात्मक या जनतंत्र शिक्षण ]
→ यह शिक्षण प्रणाली मानवीय सम्बन्धो पर आधारित है इस शिक्षण में शिक्षक एवं छात्र एक दूसरे को प्रभावित करने का प्रयत्न करते है |
[ हस्तक्षेप रहित शिक्षण ]
→ इस प्रकार का शिक्षण करते समय शिक्षक छात्र के साथ मित्रवत व्यव्हार करता है |
शिक्षण प्रकिया के चर :
→ जब कोई कारक शिक्षा के क्षेत्र के शैक्षिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है तो उसे चर कहते है |
1. स्वतंत्र चर : शिक्षण प्रक्रिया शिक्षक स्वतंत्र चर के रूप में कार्य करता है | वह छात्रों को अधिगम अनुभव प्रदान करने के लिए विभिन्न प्रकार कार्य करता है |
2. आश्रित चर : शिक्षण प्रक्रिया में छात्र को आश्रित चर की संज्ञा दी गई है क्योकि शिक्षण प्रक्रिया में नियोजन, व्यवस्था व प्रस्तुतीकरण के अनुसार ही उसे सक्रोये रूप से कार्य करना पड़ता है |
3. हस्तक्षेप चर : शिक्षण प्रक्रिया में पाठ्य वास्तु, पाठ्यक्रम, शिक्षण विधियां, शिक्षण युक्तियाँ आदि को हस्तक्षेप चर में शामिल किया जाता है |
शिक्षण चरो के कार्य :
1. निदानात्मक कार्य : (निदान सब्द का अर्थ है "कारण")
→ किसी विशिष्ट विषय में छत्र की उपलब्धि की पता लगाना|
→ अध्यन प्रक्रिया में सुधर लाने सम्बंधित तथ्यों का पता लगाना|
→ किसी विशिष्ट विषय में पिछड़े हुए छात्र का पहचान करना|
→ छात्रों के असफलता के कारन का पता लगाना|
उपचारात्मक कार्य :
∎ निदानत्मक प्रक्रिया से जो लक्षण, स्तर या कमी शिक्षक को पता चलती है, उन सभी पे नियंत्रण तथा उपचार्य करने का कार्य शिक्षक उपचारात्मक प्रक्रिया के माध्यम में करते हैं | यह कार्य शिक्षक द्वारा क्लास के अंदर किया जाता है |
मूल्यांकन कार्य :
∎ इस प्रक्रिया में शिक्षक यह देखने की कोशिश करते है करते हैं की छात्र में वांछित परिवर्तन है ? की नहीं | अगर हुआ हे तो कितना हुआ है ?
∎ मूल्यांकन सदैव शिक्षण पर निर्भर रहता है मूल्यांकन के लिए शिक्षक विभिन्न प्रकार के प्रविधियों का प्रयोग करता है तथा यह पता करने का प्रयास करते है स्टूडेंट में वसंचित परिवर्तन हुआ की नहीं|
शिक्षा के प्रकार :
1. औपचारिक शिक्षा ; औपचारिक शिक्षा से तातपर्य शिक्षा के उस प्रकार या स्वरुप से है, जो कि कुछ पूर्व निर्धारित नियमो के अन्तर्ग्रत तथा सोच विचार कर इसके लिए निर्धारित संस्थाओ ( स्कूल, महाविध्य्लयो
, विश्वविद्यालयों, अदि ) द्वारा जाती है|
∎ इस प्रकार की शिक्षा की योजना सोच विचार तथा जानबूझकर बनाई है|
∎ इसके पाठ्यकर्म की रूप रेखा पहले से तैयार है तथा इसके उद्देश्य पहले से निर्धारित कर ली जाती है|
2. निरोपचारिक शिक्षा : वह शिक्षा जो औपचारिक शिक्षा भांति विद्यालय, महाविद्यालय तथा विश्वविद्यालय की सीमा में बाँधी जाती है|परन्तु औपचारिक शिक्षा तरह इसके उद्देश्य निश्चित होते है|फर्क केवल उसकी योजना में होता है जो बहुत लालची होता है|
∎ इसका मुख्य उद्द्श्य सामान्य शिक्षा का प्रचार और शिक्षा की व्यवस्था करना होता है
∎ इसकी पाठ्यचर्या सिखने वाले की आवयसकताओं को ध्यान में रख कर निश्चित की जाती है|
3. अनौपचारिक शिक्षा : वह शिक्षा जिसकी योजना नहीं बनाई जाती है : और जिसके न उद्देश्य निश्चित होते हैं न पाठ्यचर्या और न शिक्षण विधियां और जो आकस्मिक रूप से सदैव चलती रहती है उसे अनौपचारिक शिक्षा कहते हैं |
शिक्षा मनुष्ये के जीवन भर चलती रहती है और उसका मनुष्य पर बहुत अधिक प्रभाव पढता है
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